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जहाँ पीड़ा में भी श्रृंगार की ही रचना की गयी हो !

डॉ.लाल रत्नाकर                                                        मेरी कला का क्षेत्र जितना भी है उसमें भारत के उन तमाम लोगों का हिस्सा है जिन्हें सामाजिक तौर पर सामाजिक एवं सांस्कृतिक रूपसे व् कला या कलाकारों के हिस्से में तथा भारतीय राजनीती , शिक्षा , संस्कृति  में ही कहीं जगह ही नहीं दी गयी है. यद्यपि साहित्य में तो प्रेमचंद जी ने काफी कुछ इनके बारे में लिखा है, यद्यपि यह आज विवादों में लाया जा रहा है की इसमे भी नाइंसाफी हुयी है, दलित साहित्यक|र इससे चिंतित एवं व्यग्र हैं की प्रेमचंद की दृष्टि, पीड़ित की दृष्टी नहीं रही है ? और इस आधार पर उक्त के सन्दर्भ में इसी लिए यह काम कलाओं के अन्य हिस्सों में बाकी है, उनके लिए जो सामाजिक और सांस्कृतिक यातनाओं के मध्य मानसिक रूप से पीड़ित रहने के लिए मजबूर किये जाते रहे हैं, सामाजिक गैर बराबरी के शिकार रहे है, बदलते परिवेश और माहौ...

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ये चित्र जहाँ तहां बिखरे हैं -जिन्हें जहाँ सम्मान मिला वहीँ रम गए .

डॉ.लाल रत्नाकर के चित्र

प्रेस क्लब आफ इंडिया नई देलही में गैलरी की शुरुआत डा.लाल रत्नाकर के चित्रों से आरम्भ हुई जिसका उद्घाटन पाकिस्तान की मशहूर शायर मोहतरमा फहमिदा रियाज़

प्रेस क्लब आफ इंडिया नई देलही में गैलरी की शुरुआत डा.लाल रत्नाकर के चित्रों से आरम्भ हुई

प्रेस क्लब आफ इंडिया नई देलही में गैलरी की शुरुआत डा.लाल रत्नाकर के चित्रों से आरम्भ हुई

प्रेस क्लब आफ इंडिया नई देलही में गैलरी की शुरुआत डा.लाल रत्नाकर के चित्रों से आरम्भ हुई

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