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जहाँ पीड़ा में भी श्रृंगार की ही रचना की गयी हो !

ये चित्र जहाँ तहां बिखरे हैं -जिन्हें जहाँ सम्मान मिला वहीँ रम गए .

डॉ.लाल रत्नाकर के चित्र